श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 1: कलियुग के पतित वंश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक
हत्वा काण्वं सुशर्माणं तद् भृत्यो वृषलो बली ।
गां भोक्ष्यत्यन्ध्रजातीय: कञ्चित् कालमसत्तम: ॥ २० ॥
 
शब्दार्थ
हत्वा—मार कर; काण्वम्—काण्व राजा को; सुशर्माणम्—सुशर्मा नामक; तत्-भृत्य:—उसका नौकर; वृषल:—निम्न जाति का शूद्र; बली—बली नामक; गाम्—पृथ्वी पर; भोक्ष्यति—शासन करेगा; अन्ध्र-जातीय:—अन्ध्र जाति का; कञ्चित्—कुछ; कालम्—समय तक; असत्तम:—अत्यन्त भ्रष्ट ।.
 
अनुवाद
 
 काण्वों का अन्तिम राजा सुशर्मा, अन्ध्र जाति के अधम शूद्र बली नामक अपने ही नौकर के हाथों मारा जायेगा। यह अत्यन्त भ्रष्ट महाराज बली कुछ काल तक पृथ्वी पर शासन करेगा।
 
तात्पर्य
 यहाँ पर अधिक जानकारी यह मिलती है कि किस तरह सरकारी प्रशासन में असंस्कृत लोग प्रविष्ट हो चुके थे। बली नामक तथाकथित राजा को असत्तम अर्थात् नितान्त अपवित्र, असभ्य व्यक्ति कहा गया है।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥