श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 1: कलियुग के पतित वंश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक
मागधानां तु भविता विश्वस्फूर्जि: पुरञ्जय: ।
करिष्यत्यपरो वर्णान् पुलिन्दयदुमद्रकान् ॥ ३४ ॥
 
शब्दार्थ
मागधानाम्—मगध प्रान्त के; तु—तथा; भविता—होंगे; विश्वस्फूर्जि:—विश्वस्फूर्जि; पुरञ्जय:—राजा पुरञ्जय; करिष्यति— बनायेगा; अपर:—दूसरे; वर्णान्—सारे सभ्य मनुष्य; पुलिन्द-यदु-मद्रकान्—पुलिन्द, यदु तथा मद्रक जैसे अछूतों में ।.
 
अनुवाद
 
 तब मागधों का राजा विश्वस्फूर्जि प्रकट होगा जो दूसरे पुरञ्जय के समान होगा। वह समस्त सभ्य वर्णों को निम्न श्रेणी के असभ्य मनुष्यों में बदल देगा, जिस तरह पुलिन्द, यदु तथा मद्रक होते हैं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥