श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 1: कलियुग के पतित वंश  »  श्लोक 6-8
 
 
श्लोक
नन्दिवर्धन आजेयो महानन्दि: सुतस्तत: ।
शिशुनागा दशैवैते सष्ट्युत्तरशतत्रयम् ॥ ६ ॥
समा भोक्ष्यन्ति पृथिवीं कुरुश्रेष्ठ कलौ नृपा: ।
महानन्दिसुतो राजन् शूद्रागर्भोद्भ‍वो बली ॥ ७ ॥
महापद्मपति: कश्चिन्नन्द: क्षत्रविनाशकृत् ।
ततो नृपा भविष्यन्ति शूद्रप्रायास्त्वधार्मिका: ॥ ८ ॥
 
शब्दार्थ
नन्दिवर्धन:—नन्दिवर्धन; आजेय:—अजय का पुत्र; महा-नन्दि:—महानन्दि; सुत:—पुत्र; तत:—तत्पश्चात् (नन्दिवर्धन के बाद); शिशुनागा:—शिशुनाग; दश—दश; एव—निस्सन्देह; एते—ये; सष्टि—साठ; उत्तर—अधिक; शत-त्रयम्—तीन सौ; समा:—वर्ष; भोक्ष्यन्ति—राज्य करेंगे; पृथिवीम्—पृथ्वी पर; कुरुश्रेष्ठ—हे कुरुओं में श्रेष्ठ; कलौ—इस कलियुग में; नृपा:—राजागण; महानन्दि-सुत:—महानन्दि का पुत्र; राजन्—हे राजा परीक्षित; शूद्रा-गर्भ—शूद्र स्त्री के गर्भ से; उद्भव:—जन्म लेकर; बली—बलवान; महा-पद्म—लाखों में गिनी जाने वाली सेना या सम्पत्ति; पति:—स्वामी; कश्चित्—कोई; नन्द:—नन्द; क्षत्र—राजसी श्रेणी का; विनाश-कृत्—विनाशकर्ता; तत:—तब; नृपा:—राजागण; भविष्यन्ति—होंगे; शूद्र-प्राया:—शूद्रों जैसे; तु—तथा; अधार्मिका:—अधार्मिक ।.
 
अनुवाद
 
 अजय दूसरे नन्दिवर्धन का पिता बनेगा, जिसका पुत्र महानन्दि होगा। हे कुरुश्रेष्ठ, शिशुनाग वंश के ये दस राजा कलियुग में ३६० वर्षों तक राज्य करेंगे। हे परीक्षित, राजा महानन्दि की शूद्रा पत्नी के गर्भ से अत्यन्त शक्तिशाली पुत्र होगा जो नन्द कहलायेगा। वहलाखों सैनिकों तथा प्रभूत सम्पत्ति का स्वामी होगा। वह क्षत्रियों में कहर ढायेगा और उसके बाद के प्राय: सारे राजे अधार्मिक शूद्र होंगे।
 
तात्पर्य
 यहाँ इसका वर्णन मिलता है कि विश्व में प्रामाणिक राजनीतिक सत्ता का कैसे ह्रास हुआ और किस तरह वह छिन्न-भिन्न हुई। ईश्वर के साथ ही साथ शक्तिशाली सन्त पुरुष हैं जिन्होंने सरकारी नेताओं की भूमिका ग्रहण की थी और पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधित्व किया था। किन्तु कलियुग के आते ही यह दिव्य सरकारी प्रणाली बैठ गई और अनधिकारी, असभ्य लोगों ने धीरे धीरे शासन की बागडोर अपने हाथों में ले ली।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥