श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 13: श्रीमद्भागवत की महिमा  »  श्लोक 17

 
श्लोक
क्षेत्राणां चैव सर्वेषां यथा काशी ह्यनुत्तमा ।
तथा पुराणव्रातानां श्रीमद्भ‍ागवतं द्विजा: ॥ १७ ॥
 
शब्दार्थ
क्षेत्राणाम्—पवित्र स्थलों में; च—तथा; एव—निस्सन्देह; सर्वेषाम्—समस्त; यथा—जिस तरह; काशी—बनारस; हि— निस्सन्देह; अनुत्तमा—अद्वितीय; तथा—उसी तरह; पुराण-व्रातानाम्—समस्त पुराणों में; श्रीमत्-भागवतम्— श्रीमद्भागवत; द्विजा:—हे ब्राह्मणो ।.
 
अनुवाद
 
 हे ब्राह्मणो, जिस तरह पवित्र स्थानों में काशी नगरी अद्वितीय है, उसी तरह समस्त पुराणों में श्रीमद्भागवत सर्वश्रेष्ठ है।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥