श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 13: श्रीमद्भागवत की महिमा  »  श्लोक 20

 
श्लोक
नमस्तस्मै भगवते वासुदेवाय साक्षिणे ।
य इदं कृपया कस्मै व्याचचक्षे मुमुक्षवे ॥ २० ॥
 
शब्दार्थ
नम:—नमस्कार; तस्मै—उस; भगवते—भगवान्; वासुदेवाय—वासुदेव को; साक्षिणे—परम साक्षी; य:—जो; इदम्— इस; कृपया—कृपावश; कस्मै—ब्रह्मा को; व्याचचक्षे—बतलाया; मुमुक्षवे—मुक्ति चाहने वाले को ।.
 
अनुवाद
 
 हम सर्वव्यापक साक्षी भगवान् वासुदेव को नमस्कार करते हैं जिन्होंने कृपा करके ब्रह्मा को यह विज्ञान तब बताया जब वे उत्सुकतापूर्वक मोक्ष चाह रहे थे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥