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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 2: कलियुग के लक्षण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.2.21 
अथ तेषां भविष्यन्ति मनांसि विशदानि वै ।
वासुदेवाङ्गरागातिपुण्यगन्धानिलस्पृशाम् ।
पौरजानपदानां वै हतेष्वखिलदस्युषु ॥ २१ ॥
 
शब्दार्थ
अथ—तब; तेषाम्—उनमें से; भविष्यन्ति—होंगे; मनांसि—मन; विशदानि—स्पष्ट; वै—निस्सन्देह; वासुदेव—भगवान् वासुदेव के; अङ्ग—शरीर का; राग—सुगन्धि पदार्थों से; अति-पुण्य—अत्यन्त पवित्र; गन्ध—गन्ध से युक्त; अनिल—वायु द्वारा; स्पृशाम्—स्पर्श किये हुओं का; पौर—नगरवासियों के; जन-पदानाम्—छोटे कस्बों तथा गाँवों के निवासियों के; वै—निस्सन्देह; हतेषु—मारे जाने पर; अखिल—सारे; दस्युषु—धूर्त राजाओं के ।.
 
अनुवाद
 
 जब सारे धूर्त राजा मारे जा चुकेंगे, तो शहरों तथा कस्बों के निवासी, भगवान् वासुदेव को लेपित चन्दन तथा अन्य प्रसाधनों की सुगन्धि को लाती हुई पवित्र वायु का अनुभव करेंगे और उससे उनके मन आध्यात्मिक रूप से शुद्ध हो जायेंगे।
 
तात्पर्य
 ऐसे महान् वीर द्वारा नाटकीय ढंग से बचाया जाना जो भगवान् हो, एक दिव्य अनुभव होगा। कलियुग के अन्त में असुरों की मृत्यु के साथ ही सुगन्धित वायु चलेगी जिससे वातावरण अत्यन्त मनमोहक हो जायेगा।
 
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>  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥