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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 2: कलियुग के लक्षण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.2.9 
शाकमूलामिषक्षौद्रफलपुष्पाष्टिभोजना: ।
अनावृष्टय‍ा विनङ्‌क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिता: ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
शाक—पत्तियाँ; मूल—जड़ें; आमिष—मांस; क्षौद्र—जंगली शहद; फल—फल; पुष्प—फूल; अष्टि—तथा बीज; भोजना:—खाकर; अनावृष्ट्या—सूखे के कारण; विनङ्क्ष्यन्ति—विनष्ट हो जायेंगे; दुर्भिक्ष—अकाल; कर—तथा टैक्स द्वारा; पीडिता:—पीडि़त ।.
 
अनुवाद
 
 अकाल तथा अत्यधिक कर से सताये हुए लोग पत्तियाँ, जड़ें, मांस, जंगली शहद, फल, फूल तथा बीज खाने के लिए बाध्य होंगे। सूखे से पीडि़त होकर वे पूर्णतया विनष्ट हो जायेंगे।
 
तात्पर्य
 श्रीमद्भागवत में हमारे ग्रह (लोक) के भविष्य का प्रामाणिक वर्णन हुआ है। जिस तरह वृक्ष से विलग पत्ती सूख जाती है और विनष्ट हो जाती है उसी तरह जब मानव समाज का सम्बन्ध भगवान् से टूट जाता है, तो हिंसा तथा अव्यवस्था के कारण वह म्लान होकर बिखर जाता है। कम्प्यूटर तथा प्रक्षेपास्त्र होने पर भी यदि भगवान् वर्षा नहीं करें तो हम भूखों मर जायेंगे।
 
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>  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥