श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 2: हृदय में भगवान्  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक
प्रसन्नवक्त्रं नलिनायतेक्षणं
कदम्बकिञ्जल्कपिशङ्गवाससम् ।
लसन्महारत्नहिरण्मयाङ्गदं
स्फुरन्महारत्नकिरीटकुण्डलम् ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
प्रसन्न—प्रसन्नता सूचित करता; वक्त्रम्—मुख; नलिन-आयत—कमल की पंखडिय़ों के समान फैली; ईक्षणम्—आँखें; कदम्ब—कदम्ब पुष्प; किञ्जल्क—केसर; पिशङ्ग—पीला; वाससम्—वस्त्र; लसत्—लटकता हुआ; महा-रत्न—बहुमूल्य रत्न; हिरण्मय—स्वर्ण निर्मित; अङ्गदम्—आभूषण; स्फुरत्—चमकता; महा-रत्न—मूल्यवान रत्न; किरीट—मुकुट; कुण्डलम्— कान के कुण्डल ।.
 
अनुवाद
 
 उनका मुख उनकी प्रसन्नता को व्यक्त करता है। उनकी आँखें कमल की पंखडिय़ों के समान हैं और उनका वस्त्र कदम्ब पुष्प के केसर के समान पीले रंग का तथा बहुमूल्य रत्नों से जटित है। उनके सारे आभूषण स्वर्ण से निर्मित तथा रत्नों से जटित हैं। वे चमकीला मुकुट तथा कुण्डल धारण किये हुए हैं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥