श्रीमद् भागवतम
 
हिंदी में पढ़े और सुनें
भागवत पुराण  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 5: समस्त कारणों के कारण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक
सत्त्वं रजस्तम इति निर्गुणस्य गुणास्त्रय: ।
स्थितिसर्गनिरोधेषु गृहीता मायया विभो: ॥ १८ ॥
 
शब्दार्थ
सत्त्वम्—सतोगुण; रज:—रजोगुण; तम:—तमोगुण; इति—ये सब; निर्गुणस्य—ब्रह्म के; गुणा: त्रय:—तीन गुण हैं; स्थिति— पालन; सर्ग—उत्पत्ति; निरोधेषु—संहार में; गृहीता:—स्वीकृत; मायया—बहिरंगा शक्ति के द्वारा; विभो:—परमेश्वर की ।.
 
अनुवाद
 
 परमेश्वर अपने शुद्ध आध्यात्मिक रूप में सारे भौतिक गुणों से परे होते हैं, फिर भी भौतिक जगत की सृष्टि, उसके पालन तथा संहार के लिए वे अपनी बहिरंगा शक्ति के माध्यम से प्रकृति के गुणों को—सतो, रजो तथा तमो गुणों को—स्वीकार करते हैं।
 
तात्पर्य
 परमेश्वर उस बहिरंगा शक्ति के स्वामी हैं, जो सतो, रजो तथा तमो—इन तीन गुणों द्वारा व्यक्त होती है और इस शक्ति के स्वामी होने के कारण वे कभी भी इस मोहक शक्ति से प्रभावित नहीं होते। किन्तु जीव ऐसे गुणों से या तो प्रभावित रहते हैं या उनके प्रभावित होने की सम्भावना बनी रहती है—भगवान् तथा जीव में यही प्रमुख अन्तर है। यद्यपि जीव मूलत: गुणात्मक दृष्टि से भगवान् से एक हैं, किन्तु जीव इन गुणों द्वारा प्रभावित होते रहते हैं। दूसरे शब्दों में, ये भौतिक गुण भगवान् की बहिरंगा शक्ति से उत्पन्न होने के कारण निश्चय ही भगवान् से सम्बन्धित होते हैं, लेकिन यह सम्बन्ध स्वामी तथा दास जैसा होता है। परमेश्वर भौतिक शक्ति के नियामक हैं, किन्तु सारे जीव भौतिक जगत में फँसे होने के कारण न तो स्वामी हैं, न नियामक प्रत्युत वे ऐसी शक्ति द्वारा नियन्त्रित होते हैं या उसके अधीन हो जाते हैं। वास्तव में, भगवान् अपनी अन्तरंगा या आध्यात्मिक शक्ति से उसी प्रकार नित्य प्रकट रहते हैं, जिस तरह स्वच्छ आकाश में सूर्य तथा उसकी किरणें प्रकट होती हैं। लेकिन कभी-कभी वे भौतिक शक्ति उत्पन्न करते हैं, जिस तरह सूर्य निर्मल आकाश में बादल उत्पन्न कर देता है। जिस प्रकार सूर्य बादल के टुकड़े से अप्रभावित रहता है, उसी प्रकार अनन्त भगवान् भौतिक शक्ति के धब्बे से जो कभी-कभी भगवान् की ब्रह्मज्योति की किरणों के असीम विस्तार में प्रकट हो जाता है, अप्रभावित रहते हैं।
 
शेयर करें
       
 
  All glories to saints and sages of the Supreme Lord.
  Disclaimer: copyrights reserved to BBT India and BBT Intl.

 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥