श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 1: विदुर द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक
श्रीशुक उवाच
एवमेतत्पुरा पृष्टो मैत्रेयो भगवान् किल ।
क्षत्‍त्रा वनं प्रविष्टेन त्यक्त्वा स्वगृहमृद्धिमत् ॥ १ ॥
 
शब्दार्थ
श्री-शुक: उवाच—श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा; एवम्—इस प्रकार; एतत्—यह; पुरा—पूर्व काल में; पृष्ट:—पूछने पर; मैत्रेय:—मैत्रेय ऋषि ने कहा; भगवान्—अनुग्रहकारी; किल—निश्चय ही; क्षत्त्रा—विदुर द्वारा; वनम्—जंगल में; प्रविष्टेन— प्रविष्ट हुए; त्यक्त्वा—त्याग कर; स्व-गृहम्—अपना घर; ऋद्धिमत्—समृद्ध ।.
 
अनुवाद
 
 शुकदेव गोस्वामी ने कहा : अपना समृद्ध घर त्याग कर जंगल में प्रवेश करके महान् भक्त राजा विदुर ने अनुग्रहकारी मैत्रेय ऋषि से यह प्रश्न पूछा।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥