श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 10: सृष्टि के विभाग  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक
खरोऽश्वोऽश्वतरो गौर: शरभश्चमरी तथा ।
एते चैकशफा: क्षत्त: श‍ृणु पञ्चनखान् पशून् ॥ २३ ॥
 
शब्दार्थ
खर:—गधा; अश्व:—घोड़ा; अश्वतर:—खच्चर; गौर:—सफेद हिरन; शरभ:—भैंसा; चमरी—चँवरी गाय; तथा—इस प्रकार; एते—ये सभी; च—तथा; एक—केवल एक; शफा:—खुर; क्षत्त:—हे विदुर; शृणु—सुनो; पञ्च—पाँच; नखान्—नाखून वाले; पशून्—पशुओं के बारे में ।.
 
अनुवाद
 
 घोड़ा, खच्चर, गधा, गौर, शरभ-भैंसा तथा चँवरी गाय इन सबों में केवल एक खुर होता है। अब मुझसे उन पशुओं के बारे में सुनो जिनके पाँच नाखून होते हैं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥