श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 11: परमाणु से काल की गणना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक
चत्वारि त्रीणि द्वै चैकं कृतादिषु यथाक्रमम् ।
संख्यातानि सहस्राणि द्विगुणानि शतानि च ॥ १९ ॥
 
शब्दार्थ
चत्वारि—चार; त्रीणि—तीन; द्वे—दो; च—भी; एकम्—एक; कृत-आदिषु—सत्य युग में; यथा-क्रमम्—बाद में अन्य; सङ्ख्यातानि—संख्या वाले; सहस्राणि—हजारों; द्वि-गुणानि—दुगुना; शतानि—सौ; च—भी ।.
 
अनुवाद
 
 सत्य युग की अवधि देवताओं के ४,८०० वर्ष के तुल्य है; त्रेतायुग की अवधि ३,६०० दैवी वर्षों के तुल्य, द्वापर युग की २,४०० वर्ष तथा कलियुग की अवधि १,२०० दैवी वर्षों के तुल्य है।
 
तात्पर्य
 जैसाकि ऊपर कहा गया है देवताओं का एक वर्ष मनुष्यों के ३६० वर्षों के बराबर होता है। अत: सत्ययुग की अवधि ४,८००×३६०=१७,२८,००० वर्ष हुई। इसी तरह त्रेतायुग की अवधि ३६००×३६०=१२,९६,००० वर्ष, द्वापर युग की २,४००×३६०=८,६४,००० वर्ष तथा कलियुग की अवधि १,२००×३६०=४,३२,००० वर्ष है।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥