श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 11: परमाणु से काल की गणना  »  श्लोक 34

 
श्लोक
यदर्धमायुषस्तस्य परार्धमभिधीयते ।
पूर्व: परार्धोऽपक्रान्तो ह्यपरोऽद्य प्रवर्तते ॥ ३४ ॥
 
शब्दार्थ
यत्—जो; अर्धम्—आधा; आयुष:—आयु का; तस्य—उसका; परार्धम्—एक परार्ध; अभिधीयते—कहलाता है; पूर्व:—पहले वाला; पर-अर्ध:—आधी आयु; अपक्रान्त:—बीत जाने पर; हि—निश्चय ही; अपर:—बाद वाला; अद्य—इस युग में; प्रवर्तते— प्रारम्भ करेगा ।.
 
अनुवाद
 
 ब्रह्मा के जीवन के एक सौ वर्ष दो भागों में विभक्त हैं प्रथमार्ध तथा द्वितीयार्ध या परार्ध। ब्रह्मा के जीवन का प्रथमार्ध समाप्त हो चुका है और द्वितीयार्ध अब चल रहा है।
 
तात्पर्य
 इस ग्रन्थ में अनेक स्थलों पर ब्रह्मा के जीवन के एक सौ वर्षों की अवधि की व्याख्या की जा चुकी है और भगवद्गीता (८.१७) में भी इसका वर्णन हुआ
है। ब्रह्मा की आयु के पचास वर्ष बीत चुके हैं और अगले पचास वर्ष अभी पूरे होने हैं। तब ब्रह्मा के लिए भी मृत्यु अपरिहार्य हो जाएगी।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥