श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक
छायाया: कर्दमो जज्ञे देवहूत्या: पति: प्रभु: ।
मनसो देहतश्चेदं जज्ञे विश्वकृतो जगत् ॥ २७ ॥
 
शब्दार्थ
छायाया:—छाया से; कर्दम:—कर्दम मुनि; जज्ञे—प्रकट हुआ; देवहूत्या:—देवहूति का; पति:—पति; प्रभु:—स्वामी; मनस:—मन से; देहत:—शरीर से; च—भी; इदम्—यह; जज्ञे—उत्पन्न किया; विश्व—ब्रह्माण्ड; कृत:—स्रष्टा का; जगत्— विराट जगत ।.
 
अनुवाद
 
 महान् देवहूति के पति कर्दम मुनि ब्रह्मा की छाया से प्रकट हुए। इस तरह सभी कुछ ब्रह्मा के शरीर से या मन से प्रकट हुआ।
 
तात्पर्य
 यद्यपि प्रकृति के तीन गुणों में से सदैव एक की प्रधानता रहती है किन्तु वे कभी भी एक दूसरे से मिश्रित हुए बिना प्रदर्शित नहीं होते। यहाँ तक कि रजो तथा तमो इन दो निम्नतर गुणों की उपस्थिति में भी कभी-कभी सतोगुण का अंश रहता है। अत: ब्रह्मा के शरीर या मन से उत्पन्न सारे पुत्र रजोगुणी तथा तमोगुणी थे, किन्तु उनमें से कुछ, यथा कर्दम मुनि सतोगुण से उत्पन्न थे। नारद ब्रह्मा की दिव्य अवस्था में उत्पन्न हुए थे।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥