श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक
इतिहासपुराणानि पञ्चमं वेदमीश्वर: ।
सर्वेभ्य एव वक्त्रेभ्य: ससृजे सर्वदर्शन: ॥ ३९ ॥
 
शब्दार्थ
इतिहास—इतिहास; पुराणानि—पुराण (पूरक वेद); पञ्चमम्—पाँचवाँ; वेदम्—वैदिक वाङ्मय; ईश्वर:—भगवान्; सर्वेभ्य:— सब मिला कर; एव—निश्चय ही; वक्त्रेभ्य:—अपने मुखों से; ससृजे—उत्पन्न किया; सर्व—चारों ओर; दर्शन:—जो हर समय देख सकता है ।.
 
अनुवाद
 
 तब उन्होंने अपने सारे मुखों से पाँचवें वेद—पुराणों तथा इतिहासों—की सृष्टि की, क्योंकि वे सम्पूर्ण भूत, वर्तमान तथा भविष्य को देख सकते थे।
 
तात्पर्य
 विशिष्ट देशों तथा राष्ट्रों के और इसी के साथ संसार के अपने इतिहास हैं, किन्तु पुराण सारे ब्रह्माण्ड के, न केवल एक कल्प के अपितु अनेक कल्पों के, इतिहास हैं। ब्रह्मा को इन ऐतिहासिक तथ्यों का ज्ञान है, अतएव सभी पुराण इतिहास हैं। चूँकि उनकी मूल रचना ब्रह्मा द्वारा की गई, अतएव वे वेदों के अंग रूप हैं और पंचम वेद कहलाते हैं।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥