श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 55

 
श्लोक
तदा मिथुनधर्मेण प्रजा ह्येधाम्बभूविरे ॥ ५५ ॥
 
शब्दार्थ
तदा—उस समय; मिथुन—यौन जीवन; धर्मेण—विधि-विधानों के अनुसार; प्रजा:—सन्तानें; हि—निश्चय ही; एधाम्—बढ़ी हुई; बभूविरे—घटित हुई ।.
 
अनुवाद
 
 तत्पश्चात् उन्होंने सम्भोग द्वारा क्रमश: एक एक करके जनसंख्या की पीढिय़ों में वृद्धि की।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥