श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 15: ईश्वर के साम्राज्य का वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक
येऽभ्यर्थितामपि च तो नृगतिं प्रपन्ना
ज्ञानं च तत्त्वविषयं सहधर्मं यत्र ।
नाराधनं भगवतो वितरन्त्यमुष्य
सम्मोहिता विततया बत मायया ते ॥ २४ ॥
 
शब्दार्थ
ये—वे व्यक्ति; अभ्यर्थिताम्—वांछित; अपि—निश्चय ही; च—तथा; न:—हमारे (ब्रह्मा तथा अन्य देवताओं) द्वारा; नृ- गतिम्—मनुष्य योनि; प्रपन्ना:—प्राप्त किया है; ज्ञानम्—ज्ञान; च—तथा; तत्त्व-विषयम्—परब्रह्म का विषय; सह-धर्मम्— धार्मिक सिद्धान्तों सहित; यत्र—जहाँ; न—नहीं; आराधनम्—पूजा; भगवत:—भगवान् की; वितरन्ति—सम्पन्न करते हैं; अमुष्य—परमेश्वर का; सम्मोहिता:—मोहग्रस्त; विततया—सर्वव्यापी; बत—हाय; मायया—माया के प्रभाव से; ते—वे ।.
 
अनुवाद
 
 ब्रह्माजी ने कहा : हे प्रिय देवताओ, मनुष्य जीवन इतना महत्वपूर्ण है कि हमें भी ऐसे जीवन को पाने की इच्छा होती है, क्योंकि मनुष्य रूप में पूर्ण धार्मिक सत्य तथा ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। यदि इस मनुष्य जीवन में कोई व्यक्ति भगवान् तथा उनके धाम को नहीं समझ पाता तो यह समझना होगा कि वह बाह्य प्रकृति के प्रभाव से अत्यधिक ग्रस्त है।
 
तात्पर्य
 ब्रह्माजी मनुष्य की दशा की अत्यधिक निन्दा करते हैं, जो भगवान् तथा उनके दिव्य धाम वैकुण्ठ में रुचि नहीं लेता। ब्रह्माजी तक मनुष्य जीवन की कामना करते हैं। ब्रह्मा तथा अन्य देवताओं को मनुष्यों की अपेक्षा अधिक उत्तम शरीर प्राप्त हैं फिर भी ब्रह्मा समेत सारे देवता मनुष्य जीवन प्राप्त करना चाहते हैं, क्योंकि यह विशेष रूप से उसी जीव के लिए होता है, जो दिव्य ज्ञान तथा धार्मिक सिद्धि प्राप्त कर सके। एक जीवन में भगवद्धाम वापस जाना सम्भव नहीं है, किन्तु कम से कम मनुष्य जीवन में जीव को जीवन-लक्ष्य को समझकर कृष्णभावनामृत शुरू कर देना चाहिए। कहा जाता है कि मनुष्य जीवन महान् वरदान है, क्योंकि अविद्या के सागर को पार करने के लिए यह सर्वोपयुक्त नाव है। आध्यात्मिक गुरु को उस नाव का सबसे समर्थ कप्तान (नाविक) माना जाता है और शास्त्रों से प्राप्त जानकारी अविद्या के सागर पर तैरने के लिए अनुकूल वायु है। जो मनुष्य इस जीवन में इन सभी सुविधाओं का लाभ नहीं उठाता वह आत्महत्या करता है। अतएव जो व्यक्ति मनुष्य जीवन में आकर कृष्णभावनामृत शुरू नहीं करता वह माया के वशीभूत होकर अपना जीवन गँवा बैठता है। ब्रह्माजी ऐसे मनुष्य की स्थिति पर शोक व्यक्त करते हैं।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥