श्रीमद् भागवतम
 
हिंदी में पढ़े और सुनें
भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 19: असुर हिरण्याक्ष का वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक
यो वै हिरण्याक्षवधं महाद्भुतं
विक्रीडितं कारणसूकरात्मन: ।
श‍ृणोति गायत्यनुमोदतेऽञ्जसा
विमुच्यते ब्रह्मवधादपि द्विजा: ॥ ३७ ॥
 
शब्दार्थ
य:—जो; वै—निस्सन्देह; हिरण्याक्ष-वधम्—हिरण्याक्ष के वध का; महा-अद्भुतम्—अत्यन्त विस्मयजनक; विक्रीडितम्—लीला; कारण—समुद्र से पृथ्वी के उद्धार जैसे कारणों के लिए; सूकर—सूकर रूप में प्रकट होकर; आत्मन:—श्रीभगवान् का; शृणोति—सुनता है; गायति—जप करता है; अनुमोदते—आनन्द लेता है; अञ्जसा— तुरन्त; विमुच्यते—मुक्त हो जाता है; ब्रह्म-वधात्—ब्रह्महत्या के पाप से; अपि—भी; द्विजा:—हे ब्राह्मणो ।.
 
अनुवाद
 
 हे ब्राह्मणो, जगत के उद्धार हेतु आदि सूकर रूप में प्रकट होने वाले भगवान् द्वारा हिरण्याक्ष वध के इस अद्भुत आख्यान को जो कोई सुनता है, गाता है या इसमें रस लेता है, वह ब्रह्महत्या जैसे पापमय कर्मों के फल से भी तुरन्त मुक्त हो जाता है।
 
तात्पर्य
 चूँकि श्रीभगवान् परम पद पर आसीन हैं, अत: उनकी लीलाओं तथा उनके व्यक्तित्व में कोई अन्तर नहीं है। अत: जो भी भगवान् की लीलाओं से अपना नाता जोड़ता है, वह भगवान् से प्रत्यक्ष जुड़ता है और जो इस प्रकार जुड़ जाता है, वह समस्त पापमय कर्मों से, यहाँ तक कि ब्रह्महत्या जैसे पाप से भी मुक्त हो जाता है, यद्यपि इसे संसार की सबसे अधिक पापमय कृत्य माना जाता है। मनुष्य को चाहिए कि शुद्ध भक्त जैसे अधिकृत स्रोत से भगवान् के कार्यकलापों को सुनने के लिए उत्सुक रहे। यदि कोई भगवान् के आख्यान का श्रवण मात्र करता है और भगवान् के गुणों को स्वीकार करता है, तो वह योग्य बन जाता है। मायावादी कभी भी भगवान् के कृत्यों को नहीं समझ सकते। वे उनके समस्त कार्यों को माया मानते हैं, इसीलिए तो वे मायावादी कहलाते हैं। चूँकि उनके लिए हर वस्तु माया है, अत: ऐसे आख्यान उनके लिए नहीं हैं। कुछ निर्विशेषवादी श्रीमद्भागवत को सुनना नहीं चाहते, यद्यपि उनमें से अनेक आर्थिक लाभ के लिए उसमें अब रुचि दिखाने लगे हैं। किन्तु वास्तविक रूप में वे श्रद्धा नहीं रखते। उल्टे, वे अपने ही ढंग से इसका वर्णन करते हैं। अत: हमें मायावादियों से इसको नहीं सुनना चाहिए। हमें तो सूत गोस्वामी या मैत्रेय से सुनना चाहिए जो आख्यानों को यावत् रूप में प्रस्तुत करने वाले हैं। तभी हम भगवान् की लीलाओं का रसास्वादन कर सकेंगे अन्यथा नवदीक्षित श्रोताओं पर विषतुल्य प्रभाव पड़ेगा।
 
शेयर करें
       
 
  All glories to saints and sages of the Supreme Lord.
  Disclaimer: copyrights reserved to BBT India and BBT Intl.

 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥