श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 21: मनु-कर्दम संवाद  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक
स चेह विप्र राजर्षिर्महिष्या शतरूपया ।
आयास्यति दिद‍ृक्षुस्त्वां परश्वो धर्मकोविद: ॥ २६ ॥
 
शब्दार्थ
स:—स्वायंभुव मनु; च—तथा; इह—यहाँ; विप्र—हे पवित्र ब्राह्मण; राज-ऋषि:—साधु राजा; महिष्या—अपनी रानी (महिषी) सहित; शतरूपया—शतरूपा नामक; आयास्यति—आएंगे; दिदृक्षु:—देखने की इच्छा से; त्वाम्—तुमको; परश्व:—परसों; धर्म—धार्मिक कृत्यों में; कोविद:—दक्ष ।.
 
अनुवाद
 
 हे ब्राह्मण, धार्मिक कृत्यों में दक्ष सुप्रसिद्ध सम्राट अपनी पत्नी शतरूपा सहित तुम्हें देखने के लिए परसों यहाँ आएँगे।
 
 
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  All glories to saints and sages of the Supreme Lord.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥