श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 21: मनु-कर्दम संवाद  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक
गृहीतार्हणमासीनं संयतं प्रीणयन्मुनि: ।
स्मरन् भगवदादेशमित्याह श्लक्ष्णया गिरा ॥ ४९ ॥
 
शब्दार्थ
गृहीत—प्राप्त करके; अर्हणम्—सम्मान; आसीनम्—बैठा हुआ; संयतम्—शान्त; प्रीणयन्—प्रमुदित करता; मुनि:—मुनि; स्मरन्—स्मरण करते हुए; भगवत्—भगवान् की; आदेशम्—आज्ञा; इति—इस प्रकार; आह—बोला; श्लक्ष्णया—मीठी; गिरा—वाणी से ।.
 
अनुवाद
 
 मुनि से सम्मान पाकर राजा स्वयांभुव मनु बैठ गये और शान्त बने रहे। तब भगवान् की आदेशों का स्मरण करते हुए कर्दम मुनि अपनी मधुर वाणी से राजा को प्रमुदित करते हुए इस प्रकार बोले।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥