श्रीमद् भागवतम
 
हिंदी में पढ़े और सुनें
भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक
विश्रम्भेणात्मशौचेन गौरवेण दमेन च ।
शुश्रूषया सौहृदेन वाचा मधुरया च भो: ॥ २ ॥
 
शब्दार्थ
विश्रम्भेण—आत्मीयता से; आत्म-शौचेन—मन तथा देह की शुद्धता से; गौरवेण—सम्मान से; दमेन—इन्द्रियों को वश में करके; च—तथा; शुश्रूषया—सेवा से; सौहृदेन—प्रेम से; वाचा—वाणी से; मधुरया—मीठी; च—तथा; भो:—हे विदुर! ।.
 
अनुवाद
 
 हे विदुर, देवहूति ने अत्यन्त आत्मीयता और आदर के साथ, इन्द्रियों को वश में रखते हुए, प्रेम तथा मधुर वचनों से अपने पति की सेवा की।
 
तात्पर्य
 यहाँ पर विश्रम्भेण तथा गौरवेण—ये दो शब्द अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। देवहुति ने इन्हीं दो विधियों से अपने-पति की सेवा की। ये दोनों विधियाँ हैं जिनके द्वारा पति अथवा श्रीभगवान् की सेवा की जाती है। विश्रम्भेण का अर्थ है “आत्मीयतापूर्वक” और गौरवेण का अर्थ है “अत्यन्त सम्मानपूर्वक।” पति अत्यन्त आत्मीय मित्र होता है, अत: पत्नी को चाहिए कि आत्मीय मित्र की भाँति पति की सेवा करे और साथ ही पति की स्थिति की श्रेष्ठता को भी समझे। इस प्रकार वह उसका सभी प्रकार से सम्मान करे। एक पुरुष तथा एक स्त्री के मनोभावों में अन्तर होता है। अपनी शारीरिक संरचना के कारण पति सदैव पत्नी से श्रेष्ठ (विशिष्ट) बने रहना चाहता है और स्त्री शारीरिक संरचना के कारण स्वाभाविक रुप से अपने पति से अवर कोटि की होती है। अत: स्वाभाविक प्रवृत्ति यही है कि पति अपने को पत्नी से श्रेष्ठ मानता है और इसका पालन किया जाना चाहिए। यदि पति से कोई गलती हो जाए, तो भी पत्नी को सह लेना चाहिए और इस प्रकार पति तथा पत्नी के बीच मनमुटाव नहीं रहेगा। विश्रम्भेण का अर्थ “आत्मीयता के साथ” है, किन्तु इसका अर्थ यह भी नहीं है कि, “मान घटे नित घर के जाये।” वैदिक सभ्यता के अनुसार पत्नी अपने पति को नाम से सम्बोधित नहीं कर सकती। आधुनिक सभ्यता में पत्नी अपने पति का नाम लेकर बुला सकती है, किन्तु हिन्दू सभ्यता में ऐसा नहीं है। इस प्रकार निम्नता तथा श्रेष्ठता का द्वैत चलता है। दमेन च— पत्नी को किसी प्रकार का मनमुटाव होने पर अपने को वश में रखना सीखना चाहिए। सौहृदेन वाचा मधुरया का अर्थ है सदैव पति के कल्याण की आकांक्षा करना और उसमें मीठे वचन बोलना। बाह्य जगत में मनुष्य अनेक कारणों से विक्षुब्ध हो सकता है, अत: स्त्री को चाहिए कि घर में उससे मीठे बचन बोले।
 
शेयर करें
       
 
  All glories to Srila Prabhupada. All glories to वैष्णव भक्त-वृंद
  Disclaimer: copyrights reserved to BBT India and BBT Intl.

 
About Us | Terms & Conditions
Privacy Policy | Refund Policy
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥