श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक
भूषणानि परार्ध्यानि वरीयांसि द्युमन्ति च ।
अन्नं सर्वगुणोपेतं पानं चैवामृतासवम् ॥ २९ ॥
 
शब्दार्थ
भूषणानि—आभूषण; पर-अर्ध्यानि—अत्यन्त मूल्यवान; वरीयांसि—श्रेष्ठ; द्युमन्ति—चमकीले; च—तथा; अन्नम्— भोजन; सर्व-गुण—समस्त सद्गुण; उपेतम्—से युक्त; पानम्—पेय पदार्थ; च—तथा; एव—भी; अमृत—मधुर; आसवम्—मादक ।.
 
अनुवाद
 
 तब उन्होंने उसे उत्तम तथा बहुमूल्य आभूषणों से सजाया जो चमचमा रहे थे। फिर उन्होंने सर्वगुण सम्पन्न भोजन तथा मधुर मादक पेय पदार्थ आसवम् प्रदान किया।
 
तात्पर्य
 आसव एक आयुर्वेदिक भेषज है, यह मद्य नहीं है। यह विशेष प्रकार की औषधियों से तैयार किया जाता है और स्वस्थ रहने, पाचन आदि सुधारने के लिए होता है।
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥