श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक
एवं योगानुभावेन दम्पत्यो रममाणयो: ।
शतं व्यतीयु: शरद: कामलालसयोर्मनाक् ॥ ४६ ॥
 
शब्दार्थ
एवम्—इस प्रकार; योग-अनुभावेन—योगशक्ति से; दम्-पत्यो:—पति-पत्नी; रममाणयो:—स्वयं आनन्द भोगते हुए; शतम्—एक सौ; व्यतीयु:—बीते; शरद:—शरद ऋतुएँ; काम—रतिसुख; लालसयो:—जो लालायित थे; मनाक्— अल्प समय के समान ।.
 
अनुवाद
 
 रति सुख के उत्कट इच्छुक पति-पत्नी योग शक्तियों के बल पर विहार करते रहे और एक सौ वर्ष अल्प काल के समान व्यतीत हो गये।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥