श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक
अत: सा सुषुवे सद्यो देवहूति: स्त्रिय: प्रजा: ।
सर्वास्ताश्चारुसर्वाङ्‍ग्यो लोहितोत्पलगन्धय: ॥ ४८ ॥
 
शब्दार्थ
अत:—तब; सा—उसने; सुषुवे—जन्म दिया; सद्य:—एक ही दिन; देवहूति:—देवहूति ने; स्त्रिय:—स्त्रियाँ; प्रजा:— सन्तान; सर्वा:—सभी; ता:—वे; चारु-सर्व-अङ्ग्य:—सर्वांग सुन्दर; लोहित—लाल; उत्पल—कमल के समान; गन्धय:—सुगन्धित ।.
 
अनुवाद
 
 उसके तुरन्त बाद उसी दिन देवहूति ने नौ कन्याओं को जन्म दिया जिनके अंग अंग सुन्दर थे और उनसे लाल कमल की सी सुगन्धि निकल रही थी।
 
तात्पर्य
 देवहूति अत्यधिक कामोत्तेजित थी जिससे उसके अधिक अण्डाणु स्खलित हुए और नौ कन्याएँ उत्पन्न हुईं। स्मृतिशास्त्र तथा साथ ही साथ आयुर्वेद में यह कहा गया है कि जब पुरुष का स्खलन अधिक होता है, तो पुत्र उत्पन्न होते हैं और जब स्त्री का स्खलन अधिक होता है, तो पुत्रियाँ होती हैं। परिस्थितियों से प्रतीत होता है कि देवहूति अधिक कामोत्तेजित थी, अत: उसने तुरन्त नौ कन्याओं को जन्म दिया। किन्तु सभी कन्याएँ अतीव सुन्दर थीं और उनके शरीर सुगठित थे, उनमें से प्रत्येक कमलपुष्प के समान थी और कमल के ही समान सुगन्धित भी।
 
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