श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक
गते शतधृतौ क्षत्त: कर्दमस्तेन चोदित: ।
यथोदितं स्वदुहितृ: प्रादाद्विश्वसृजां तत: ॥ २१ ॥
 
शब्दार्थ
गते—चले जाने के बाद; शत-धृतौ—भगवान् ब्रह्मा; क्षत्त:—हे विदुर; कर्दम:—कर्दम मुनि; तेन—उसके द्वारा; चोदित:—आदेशित होकर; यथा-उदितम्—कहे जाने के अनुसार; स्व-दुहितृ:—अपनी कन्याएँ; प्रादात्—प्रदान कर दिया; विश्व-सृजाम्—प्राणियों के स्रष्टा; तत:—तदनन्तर ।.
 
अनुवाद
 
 हे विदुर ब्रह्माजी, कर्दम मनि ने अपनी नवों पुत्रियों को ब्रह्मा द्वारा दिये गये आदेशों के अनुसार नौ ऋषियों को प्रदान कर दिया, जिन्होंने इस संसार के मनुष्यों का सृजन किया।
 
 
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  All glories to saints and sages of the Supreme Lord.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥