श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक
अथर्वणेऽददाच्छान्तिं यया यज्ञो वितन्यते ।
विप्रर्षभान् कृतोद्वाहान् सदारान् समलालयत् ॥ २४ ॥
 
शब्दार्थ
अथर्वणे—अथर्वा को; अददात्—प्रदान किया; शान्तिम्—शान्ति; यया—जिसके द्वारा; यज्ञ:—यज्ञ; वितन्यते— किया जाता है; विप्र-ऋषभान्—ब्राह्मणों में अग्रगण्य; कृत-उद्वाहान्—विवाह कर दिया; स-दारान्—उनकी पत्नियों सहित; समलालयत्—पालन किया ।.
 
अनुवाद
 
 उन्होंने शान्ति अथर्वा को प्रदान की। शान्ति के कारण यज्ञ अच्छी तरह सम्पन्न होने लगे। इस प्रकार उन्होंने अग्रणी ब्राह्मणों से उन सबका विवाह कर दिया और पत्नियों सहित उन सबका पालन करने लगे।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥