श्रीमद् भागवतम
 
हिंदी में पढ़े और सुनें
भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक
अवादयंस्तदा व्योम्नि वादित्राणि घनाघना: ।
गायन्ति तं स्म गन्धर्वा नृत्यन्त्यप्सरसो मुदा ॥ ७ ॥
 
शब्दार्थ
अवादयन्—बजाते हुए; तदा—उस समय; व्योम्नि—आकाश में; वादित्राणि—वाद्ययंत्र, बाजे; घनाघना:—बादल; गायन्ति—गाने लगे; तम्—उसको; स्म—निश्चय ही; गन्धर्वा:—गंधर्वगण; नृत्यन्ति—नाचने लगे; अप्सरस:— अप्सराएँ; मुदा—आनन्दित होकर ।.
 
अनुवाद
 
 पृथ्वी पर उनके अवतरित होते समय, आकाश में देवताओं ने वाद्ययंत्रों के रूप में जल बरसाने वाले मेघों से वाद्यसंगीत की सी ध्वनियाँ बजायी। स्वर्गिक गवैये गंधर्वगण भगवान् की महिमा का गान करने लगे और अप्सराओं के नाम से प्रसिद्ध स्वर्गिक नर्तकियाँ आनन्द विभोर होकर नाचने लगीं।
 
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥