श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 9

 
श्लोक
तत्कर्दमाश्रमपदं सरस्वत्या परिश्रितम् ।
स्वयम्भू: साकमृषिभिर्मरीच्यादिभिरभ्ययात् ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
तत्—वह; कर्दम—कर्दम के; आश्रम-पदम्—आश्रम के स्थान पर; सरस्वत्या—सरस्वती नदी के द्वारा; परिश्रितम्— घिरा हुआ; स्वयम्भू:—ब्रह्मा (आत्म-जन्मा); साकम्—साथ; ऋषिभि:—ऋषियों के; मरीचि—मरीचि मुनि; आदिभि:—तथा अन्य; अभ्ययात्—वहाँ आये ।.
 
अनुवाद
 
 सर्वप्रथम सृजित जीव ब्रह्मा मरीचि तथा अन्य मुनियों के साथ कर्दम के आश्रम गये, जो सरस्वती नदी से चारों ओर से घिरा था।
 
तात्पर्य
 ब्रह्मा को स्वयम्भू कहा जाता है, क्योंकि वे भौतिक रूप से किसी माता पिता के बिना ही सृजित हैं। वे प्रथम जीव, हैं, जो
भगवान् गर्भोदकशायी विष्णु के नाभि-कमल से उत्पन्न हैं। इसीलिए उन्हें स्वयंभू अर्थात् स्वत: जन्मा कहा जाता है।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥