श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 26: प्रकृति के मूलभूत सिद्धान्त  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक
महाभूतानि पञ्चैव भूरापोऽग्निर्मरुन्नभ: ।
तन्मात्राणि च तावन्ति गन्धादीनि मतानि मे ॥ १२ ॥
 
शब्दार्थ
महा-भूतानि—स्थूल तत्त्व; पञ्च—पाँच; एव—ठीक-ठीक; भू:—पृथ्वी; आप:—जल; अग्नि:—अग्नि; मरुत्— वायु; नभ:—आकाश; तत्-मात्राणि—सूक्ष्म तत्त्व; च—तथा; तावन्ति—इतने सारे; गन्ध-आदीनि—गंध इत्यादि (स्वाद, रंग, स्पर्श तथा ध्वनि); मतानि—माने जाते हैं; मे—मेरे द्वारा ।.
 
अनुवाद
 
 पाँच स्थूल तत्त्वों के नाम हैं पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश (शून्य)। सूक्ष्म तत्त्व भी पाँच हैं—गंध, स्वाद, रंग, स्पर्श तथा शब्द (ध्वनि)।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥