श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 28: भक्ति साधना के लिए कपिल के आदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक
प्रसन्नवदनाम्भोजं पद्मगर्भारुणेक्षणम् ।
नीलोत्पलदलश्यामं शङ्खचक्रगदाधरम् ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
प्रसन्न—प्रसन्न; वदन—मुख; अम्भोजम्—कमलवत्; पद्म-गर्भ—कमल का भीतरी भाग; अरुण—लाल; ईक्षणम्— आँखों से; नील-उत्पल—नील कमल; दल—पंखडिय़ाँ; श्यामम्—श्याम रंग की; शङ्ख—शंख; चक्र—चक्र; गदा— गदा; धरम्—धारण किये हुए ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् का मुख उत्फुल्ल कमल के समान है और लाल लाल आँखें कमल के कोश (भीतरी भाग) के समान हैं। उनका श्यामल शरीर नील कमल की पंखडिय़ों के समान है। वे अपने तीन हाथों में शङ्ख, चक्र तथा गदा धारण किये हैं।
 
तात्पर्य
 यहाँ पर यह निश्चित रूप से संस्तुति की गई है कि मन को विष्णु के रूप पर एकाग्र किया जाय। विष्णु के बारह भिन्न-भिन्न रूप हैं जिनका वर्णन चैतन्य महाप्रभु का शिक्षामृत में दिया हुआ है। शून्य या निराकार पर मन को एकाग्र नहीं किया जा सकता; मन को भगवान् के सगुण रूप में एकाग्र करना चाहिए जिनका मुख-मंडल प्रसन्न हो, जैसाकि इस श्लोक में कहा गया है। भगवद्गीता का कथन है कि ध्यानकर्ता के लिए निराकार या शून्य रूप का ध्यान कष्टप्रद है। जो लोग निराकार या शून्य का ध्यान करने में अनुराग रखते हैं उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि लोग किसी निराकार वस्तु में ध्यान एकाग्र करने के अभ्यस्त नहीं हैं। वस्तुत: ऐसी एकाग्रता सम्भव भी नहीं है। भगवद्गीता में भी पुष्टि की गई है कि भगवान् पर ही ध्यान केन्द्रित किया जाय।

यहाँ पर भगवान् कृष्ण का रंग नीलोत्पल दल के समान बताया है, जिसका अर्थ है कि यह उस कमल पुष्प के समान है, जिसकी पंखुडिय़ाँ नीली तथा श्वेत हैं। लोग प्राय: पूछते हैं कि कृष्ण का रंग श्याम (नीला) क्यों है? भगवान् का रंग किसी कलाकार की कल्पना नहीं है। इसका वर्णन प्रामाणिक शास्त्रों में हुआ है। ब्रह्म-संहिता में भी कृष्ण के शरीर की तुलना नीले (श्याम) बादल से की गई है। भगवान् का रंग काव्यात्मक कल्पना नहीं है। भगवान् के शरीर, उनके आयुधों तथा अन्य साज के विषय में ब्रह्म-संहिता, श्रीमद्भागवत, भगवद्गीता तथा कई पुराणों में प्रामाणिक वर्णन मिलते हैं। भगवान् की आकृति यहाँ पर पद्मगर्भारुणेक्षणम् जैसी बताई गई है। उनके नेत्र कमल-कोश के समान हैं और अपनी चारों भुजाओं में वे चार चिह्न शंख, चक्र, गदा तथा कमल पुष्प धारण किये हैं।

 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥