श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 3: वृन्दावन से बाहर भगवान् की लीलाएँ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक
शम्बरं द्विविदं बाणं मुरं बल्वलमेव च ।
अन्यांश्च दन्तवक्रादीनवधीत्कांश्च घातयत् ॥ ११ ॥
 
शब्दार्थ
शम्बरम्—शम्बर; द्विविदम्—द्विविद; बाणम्—बाण; मुरम्—मुर; बल्वलम्—बल्वल; एव च—तथा; अन्यान्—अन्यों को; च—भी; दन्तवक्र-आदीन्—दन्तवक्र इत्यादि को; अवधीत्—मारा; कान् च—तथा अनेक अन्यों को; घातयत्—मरवाया ।.
 
अनुवाद
 
 शम्बर, द्विविद, बाण, मुर, बल्वल जैसे राजाओं तथा दन्तवक्र इत्यादि बहुत से असुरों में से कुछ को उन्होंने स्वयं मारा और कुछ को अन्यों (यथा बलदेव इत्यादि) द्वारा मरवाया।
 
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥