श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 3: वृन्दावन से बाहर भगवान् की लीलाएँ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक
अथ ते भ्रातृपुत्राणां पक्षयो: पतितान्नृपान् ।
चचाल भू: कुरुक्षेत्रं येषामापततां बलै: ॥ १२ ॥
 
शब्दार्थ
अथ—तत्पश्चात्; ते—तुम्हारे; भ्रातृ-पुत्राणाम्—भतीजों के; पक्षयो:—दोनों पक्षों के; पतितान्—मारे गये; नृपान्—राजाओं को; चचाल—हिला दिया; भू:—पृथ्वी; कुरुक्षेत्रम्—कुरुक्षेत्र युद्धस्थल; येषाम्—जिसके; आपतताम्—चलते समय; बलै:— बल द्वारा ।.
 
अनुवाद
 
 तत्पश्चात्, हे विदुर, भगवान् ने शत्रुओं को तथा लड़ रहे तुम्हारे भतीजों के पक्ष के समस्त राजाओं को कुरुक्षेत्र के युद्ध में मरवा डाला। वे सारे राजा इतने विराट तथा बलवान थे कि जब वे युद्धभूमि में विचरण करते तो पृथ्वी हिलती प्रतीत होती।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥