श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 33: कपिल के कार्यकलाप  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक
आस्ते योगं समास्थाय साङ्ख्याचार्यैरभिष्टुत: ।
त्रयाणामपि लोकानामुपशान्त्यै समाहित: ॥ ३५ ॥
 
शब्दार्थ
आस्ते—रह रहा है; योगम्—योग; समास्थाय—अभ्यास करके; साङ्ख्य—सांख्य दर्शन के; आचार्यै:—महान् शिक्षकों द्वारा; अभिष्टुत:—पूजित; त्रयाणाम्—तीन; अपि—भी; लोकानाम्—लोकों के; उपशान्त्यै—उद्धार के लिए; समाहित:—समाधि में स्थित ।.
 
अनुवाद
 
 आज भी कपिल मुनि तीनों लोकों के बद्धजीवों के उद्धार हेतु वहाँ समाधिस्थ हैं और सांख्य दर्शन के समस्त आचार्य उनकी पूजा करते हैं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥