श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 7: विदुर द्वारा अन्य प्रश्न  »  श्लोक 32

 
श्लोक
धर्मार्थकाममोक्षाणां निमित्तान्यविरोधत: ।
वार्ताया दण्डनीतेश्च श्रुतस्य च विधिं पृथक् ॥ ३२ ॥
 
शब्दार्थ
धर्म—धार्मिकता; अर्थ—आर्थिक विकास; काम—इन्द्रियतृप्ति; मोक्षाणाम्—मोक्ष के; निमित्तानि—कारण; अविरोधत:— बिना विरोध के; वार्ताया:—जीविका के साधनों के सिद्धान्तों पर; दण्ड-नीते:—कानून तथा व्यवस्था का; च—भी; श्रुतस्य— शास्त्र संहिता का; च—भी; विधिम्—नियम; पृथक्—विभिन्न ।.
 
अनुवाद
 
 आप धर्म, आर्थिक विकास, इन्द्रियतृप्ति तथा मोक्ष के परस्पर विरोधी कारणों का और उसी के साथ जीविका के विभिन्न साधनों, विधि की विभिन्न विधियों तथा शास्त्रों में उल्लिखित व्यवस्था का भी वर्णन करें।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥