श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक
पत्नी मरीचेस्तु कला सुषुवे कर्दमात्मजा ।
कश्यपं पूर्णिमानं च ययोरापूरितं जगत् ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
पत्नी—पत्नी; मरीचे:—मरीचि नामक साधु से की; तु—भी; कला—कला नाम की; सुषुवे—जन्म दिया; कर्दम-आत्मजा— कर्दम मुनि की कन्या; कश्यपम्—कश्यप नाम का; पूर्णिमानम् च—तथा पूर्णिमा नाम की; ययो:—जिनसे; आपूरितम्—भर गये, सर्वत्र फैल गये; जगत्—संसार ।.
 
अनुवाद
 
 कर्दम मुनि की पुत्री कला का ब्याह मरीचि से हुआ जिससे दो सन्तानें हुईं जिनके नाम थे कश्यप तथा पूर्णिमा। इनकी सन्तानें सारे विश्व में फैल गईं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥