श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक
प्राणायामेन संयम्य मनो वर्षशतं मुनि: ।
अतिष्ठदेकपादेन निर्द्वन्द्वोऽनिलभोजन: ॥ १९ ॥
 
शब्दार्थ
प्राणायामेन—प्राणायाम (श्वास रोकने का अभ्यास) के द्वारा; संयम्य—वश में करके; मन:—मन; वर्ष-शतम्—एक सौ वर्ष; मुनि:—मुनि; अतिष्ठत्—वहाँ रहते हुए; एक-पादेन—एक पाँव पर खड़े होकर; निर्द्वन्द्व:—बिना द्वैत के; अनिल—वायु; भोजन:—खाकर ।.
 
अनुवाद
 
 वहाँ पर मुनि ने योगिक प्राणायाम के द्वारा अपने मन को स्थिर किया और फिर समस्त आसक्ति पर संयम करते हुए बिना भोजन खाए केवल वायु का सेवन करते रहे और सौ वर्षों तक एक पाँव पर खड़े रहे।
 
 
 
  All glories to saints and sages of the Supreme Lord.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥