श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 23

 
श्लोक
तत्प्रादुर्भावसंयोगविद्योतितमना मुनि: ।
उत्तिष्ठन्नेकपादेन ददर्श विबुधर्षभान् ॥ २३ ॥
 
शब्दार्थ
तत्—उनका; प्रादुर्भाव—प्राकट्य; संयोग—एकसाथ; विद्योतित—प्रकाशित; मना:—मन में; मुनि:—मुनि ने; उत्तिष्ठन्— जगाये जाने पर; एक-पादेन—एक ही पाँव से; ददर्श—देखा; विबुध—देवता; ऋषभान्—महापुरुष ।.
 
अनुवाद
 
 मुनि एक पैर पर खड़े थे, किन्तु उन्होंने ज्योंही देखा कि तीनों देव उनके समक्ष प्रकट हुए हैं, तो वे उन्हें देखकर इतने हर्षित हुए कि अत्यन्त कष्ट होते हुए भी वे एक ही पाँव से उनके निकट पहुँचे।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥