श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक
तस्य यक्षपतिर्देव: कुबेरस्त्विडविडासुत: ।
रावण: कुम्भकर्णश्च तथान्यस्यां विभीषण: ॥ ३७ ॥
 
शब्दार्थ
तस्य—उसके; यक्ष-पति:—यक्षों का राजा; देव:—देवता; कुबेर:—कुबेर; तु—और; इडविडा—इडविडा का; सुत:—पुत्र; रावण:—रावण; कुम्भकर्ण:—कुम्भकर्ण; च—भी; तथा—इस प्रकार; अन्यस्याम्—अन्य से; विभीषण:—विभीषण ।.
 
अनुवाद
 
 विश्रवा के दो पत्नियाँ थीं। प्रथम पत्नी इडविडा थी जिससे समस्त यक्षों का स्वामी कुबेर उत्पन्न हुआ। दूसरी पत्नी का नाम केशिनी था जिससे तीन पुत्र उत्पन्न हुए। ये थे—रावण, कुम्भकर्ण तथा विभीषण।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥