श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 24: शिवजी द्वारा की गई स्तुति का गान  »  श्लोक 13

 
श्लोक
प्राचीनबर्हिष: पुत्रा: शतद्रुत्यां दशाभवन् ।
तुल्यनामव्रता: सर्वे धर्मस्‍नाता: प्रचेतस: ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
प्राचीनबर्हिष:—राजा प्राचीनबर्हि के; पुत्रा:—पुत्र; शतद्रुत्याम्—शतद्रुति के गर्भ से; दश—दस; अभवन्—उत्पन्न हुए; तुल्य— समान; नाम—नाम; व्रता:—व्रत; सर्वे—सभी; धर्म—धार्मिकता में; स्नाता:—पूर्णतया मग्न; प्रचेतस:—सबों का प्रचेता नाम पड़ा ।.
 
अनुवाद
 
 राजा प्राचीनबर्हि ने शतद्रुति के गर्भ से दस पुत्र उत्पन्न किये। वे सभी समान रूप से धर्मात्मा थे और प्रचेता नाम से विख्यात हुए।
 
तात्पर्य
 धर्म-स्नाता: शब्द महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि दसों पुत्र धर्म में पूर्णत: रत थे। साथ ही वे समस्त उत्तम गुणों से सम्पन्न थे। मनुष्य तभी पूर्ण माना जाता
है जब वह पूर्ण रूप से धार्मिक हो, अपनी भक्ति के व्रत में पूर्ण हो, ज्ञान में पूर्ण हो एवं उत्तम आचरण वाला हो। सभी प्रचेतागण समान रूप से सिद्ध थे।
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥