श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 24: शिवजी द्वारा की गई स्तुति का गान  »  श्लोक 9

 
श्लोक
बर्हिषत् सुमहाभागो हाविर्धानि: प्रजापति: ।
क्रियाकाण्डेषु निष्णातो योगेषु च कुरूद्वह ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
बर्हिषत्—बर्हिषत्; सु-महा-भाग:—अत्यन्त भाग्यशाली; हाविर्धानि:—हाविर्धानि नामक; प्रजा-पति:—प्रजापति का पद; क्रिया-काण्डेषु—सकाम कर्म करने में; निष्णात:—लीन रहने वाला; योगेषु—योगाभ्यास में; च—भी; कुरु-उद्वह—हे कुरुओं में श्रेष्ठ (विदुर)! ।.
 
अनुवाद
 
 मैत्रेय ऋषि ने आगे कहा : हे विदुर, हविर्धान का अत्यन्त शक्तिशाली पुत्र बर्हिषत् विभिन्न प्रकार के यज्ञादि, कर्मकाण्ड तथा योगाभ्यास में अत्यन्त कुशल था। अपने महान् गुणों के कारण वह प्रजापति कहलाया।
 
तात्पर्य
 सृष्टि के प्रारम्भ में जीवों की संख्या अधिक न थी, अत: शक्तिशाली जीवात्माओं या देवताओं को सन्तान उत्पन्न करने तथा जनसंख्या बढ़ाने के लिए प्रजापति के
रूप में नियुक्त किया जाता था। प्रजापति कई थे। ब्रह्मा, दक्ष तथा मनु को भी कभी कभी प्रजापति कहा जाता है। हविर्धान का पुत्र बर्हिषत् भी इनमें से एक था।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥