श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 30: प्रचेताओं के कार्यकलाप  »  श्लोक 25

 
श्लोक
नम: कमलनाभाय नम: कमलमालिने ।
नम: कमलपादाय नमस्ते कमलेक्षण ॥ २५ ॥
 
शब्दार्थ
नम:—सादर नमस्कार है; कमल-नाभाय—भगवान् को जिनकी नाभि से आदि कमल पुष्प प्रकट हुआ; नम:—नमस्कार; कमल-मालिने—कमल पुष्प की माला धारण करने वाला; नम:—नमस्कार; कमल-पादाय—जिसके चरणकमल पुष्प के समान सुन्दर तथा सुगन्धित हैं; नम: ते—आपको नमस्कार है; कमल-ईक्षण—जिनके नेत्र कमल की पंखडिय़ों के सदृश हैं ।.
 
अनुवाद
 
 हे भगवन्, हम आपको सादर नमस्कार करते हैं, क्योंकि आपकी ही नाभि से कमल पुष्प निकलता है, जो समस्त जीवों का उद्गम है। आप सदैव कमल की माला से सुशोभित रहते हैं और आपके चरण सुगंधित कमल पुष्प के समान हैं। आपके नेत्र भी कमल पुष्प की पंखडिय़ों के सदृश हैं, अत: हम आपको सदा ही सादर नमस्कार करते हैं।
 
तात्पर्य
 कमलनाभाय शब्द सूचित करता है कि भगवान् विष्णु इस सृष्टि के उद्गम हैं। गर्भोदकशायी विष्णु की नाभि से कमल पुष्प फूटता है। इस पुष्प से ब्रह्माण्ड के पहले प्राणी श्रीब्रह्मा का जन्म होता है और बाद में ब्रह्मा सारे ब्रह्माण्ड की सृष्टि करते हैं, अत: समस्त सृष्टि के उद्गम भगवान् विष्णु हैं और सारे विष्णुतत्त्वों के उद्गम भगवान् कृष्ण हैं। फलस्वरूप समस्त वस्तुओं के उद्गम श्रीकृष्ण हैं। इसकी पुष्टि भगवद्गीता से (१०.८) भी होती है—
अहं सर्वस्य प्रभवो मत्त: सर्वं प्रवर्तते।

इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विता: ॥

“मैं अप्राकृत तथा प्राकृत जगत का कारण हूँ। प्रत्येक वस्तु मुझी से उद्भूत है। जो बुद्धिमान इसे ठीक से जानता है, वह भक्ति में लगता है और अपने हृदय से मेरी पूजा करता है।” भगवान् कृष्ण कहते हैं “मैं प्रत्येक वस्तु का उद्गम हूँ।” अत: हम जो कुछ भी देखते हैं वह उन्हीं से प्रकट होता है। वेदान्त के इस सूत्र से भी इसकी पुष्टि होती है—जन्माद्यस्य यत:—“परम सत्य वह है, जिससे प्रत्येक वस्तु उद्भूत होती है।”

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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥