श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 6: ब्रह्मा द्वारा शिवजी को मनाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक
दद‍ृशुस्तत्र ते रम्यामलकां नाम वै पुरीम् ।
वनं सौगन्धिकं चापि यत्र तन्नाम पङ्कजम् ॥ २३ ॥
 
शब्दार्थ
ददृशु:—देखा; तत्र—वहाँ (कैलास में); ते—वे (देवता); रम्याम्—अत्यन्त आकर्षक; अलकाम्—अलका; नाम—नामक; वै—निस्सन्देह; पुरीम्—धाम; वनम्—जंगल; सौगन्धिकम्—सौगन्धिक; च—तथा; अपि—भी; यत्र—जिस स्थान में; तत्- नाम—उस नाम की; पङ्कजम्—कमल पुष्पों की जाति ।.
 
अनुवाद
 
 इस प्रकार देवताओं ने सौगन्धिक नामक वन में अलका नामक विचित्र सुन्दर भाग को देखा। यह वन कमल पुष्पों की अधिकता के कारण सौगन्धिक कहलाता है। सौगन्धिक का अर्थ है “सुगन्धि से पूर्ण।”
 
तात्पर्य
 कभी-कभी अलका को अलकापुरी कहते हैं, जो कुबेर के धाम का भी नाम है। किन्तु कैलास से कुबेर का धाम नहीं देखा जा सकता। अत: यहाँ पर निर्दिष्ट अलका कुबेर की अलकापुरी से पृथक् है। वीरराघव आचार्य के अनुसार अलका का अर्थ “असामान्य रूप से सुन्दर” है। देवताओं ने जिस अलका भूभाग को देखा वहाँ सौगन्धिक नामक कमलपुष्प पाये जाते हैं, जो अपनी विशिष्ठ सुगन्धि बिखेरते रहते हैं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥