श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 20: ब्रह्माण्ड रचना का विश्लेषण  »  श्लोक 11

 
श्लोक
तद्वर्षपुरुषा: श्रुतधरवीर्यधरवसुन्धरेषन्धरसंज्ञा भगवन्तं वेदमयं सोममात्मानं वेदेन यजन्ते ॥ ११ ॥
 
शब्दार्थ
तत्-वर्ष-पुरुषा:—उन वर्षों के निवासी; श्रुतधर—श्रुतधर; वीर्यधर—वीर्यधर; वसुन्धर—वसुन्धर; इषन्धर—इषन्धर; संज्ञा:— के नाम से विख्यात; भगवन्तम्—श्रीभगवान्; वेद-मयम्—वैदिक ज्ञान से सुपरिचित; सोमम् आत्मानम्—सोम नामक जीवात्मा द्वारा प्रदर्शित; वेदेन—वैदिक नियमों के पालन से; यजन्ते—उपासना करते हैं ।.
 
अनुवाद
 
 इन द्वीपों के वासी श्रुतिधर, वीर्यधर, वसुन्धर तथा इषन्धर नामों से विख्यात हैं और वे वर्णाश्रम धर्म का कठोरता से पालन करते हुए श्रीभगवान् के सोम नामक अंश की, जो साक्षात् चन्द्रदेव हैं, उपासना करते हैं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥