श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 23: शिशुमार ग्रह-मण्डल  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक
उत्तराहनावगस्तिरधराहनौ यमो मुखेषु चाङ्गारक: शनैश्चर उपस्थे बृहस्पति: ककुदि वक्षस्यादित्यो हृदये नारायणो मनसि चन्द्रो नाभ्यामुशना स्तनयोरश्विनौ बुध: प्राणापानयो राहुर्गले केतव: सर्वाङ्गेषु रोमसु सर्वे तारागणा: ॥ ७ ॥
 
शब्दार्थ
उत्तरा-हनौ—ऊपरी जबड़े पर; अगस्ति:—अगस्ति नामक नक्षत्र; अधरा-हनौ—निचले जबड़े पर; यम:—यमराज; मुखेषु— मुख पर; च—भी; अङ्गारक:—मंगल; शनैश्चर:—शनि; उपस्थे—लिंगप्रदेश में; बृहस्पति:—बृहस्पति; ककुदि—गर्दन के पीछले भाग पर; वक्षसि—वक्ष (छाती) पर; आदित्य:—सूर्य; हृदये—हृदय में; नारायण:—भगवान् नारायण; मनसि—मन में; चन्द्र:—चन्द्रमा; नाभ्याम्—नाभि में; उशना—शुक्र; स्तनयो:—दोनों स्तनों पर; अश्विनौ—अश्विनद्वय (अश्विनी कुमार); बुध:—बुध; प्राणापानयो:—प्राण तथा अपान नामक श्वासों में; राहु:—राहु ग्रह; गले—गर्दन पर; केतव:—केतुगण; सर्व- अङ्गेषु—सम्पूर्ण शरीर पर; रोमसु—रोओं में; सर्वे—सभी; तारा-गणा:—असंख्य तारे ।.
 
अनुवाद
 
 शिशुमार की ऊपरी ठोड़ी पर अगस्ति, निचली ठोड़ी पर यमराज, मुँह में मंगल, उपस्थ में शनि, गर्दन (ककुद) पर बृहस्पति, छाती पर सूर्य, हृदय के छोर में नारायण, मन में चन्द्रमा, नाभि में शुक्र तथा स्तनों में अश्विनी कुमार स्थित हैं। प्राण और अपान नामक प्राण वायु में बुध, गले में राहु तथा समस्त शरीर पर केतु और रोमों में समस्त तारागण स्थित हैं।
 
 
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