श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 3: राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से ऋषभदेव का जन्म  »  श्लोक 12

 
श्लोक
अथ कथञ्चित्स्खलनक्षुत्पतनजृम्भणदुरवस्थानादिषु विवशानां न: स्मरणाय ज्वरमरणदशायामपि सकलकश्मलनिरसनानि तव गुणकृतनामधेयानि वचनगोचराणि भवन्तु ॥ १२ ॥
 
शब्दार्थ
अथ—अब भी; कथञ्चित्—किसी प्रकार से; स्खलन—ठोकर खाने; क्षुत्—भूख; पतन—गिरने; जृम्भण—जम्हाई लेने; दुरवस्थान—प्रतिकूल स्थिति में रहने के कारण; आदिषु—इत्यादि; विवशानाम्—असमर्थ; न:—हम सबका; स्मरणाय—याद रखने; ज्वर-मरण-दशायाम्—मृत्यु के समय तेज ज्वर की दशा में; अपि—भी; सकल—समस्त; कश्मल—पाप; निरसनानि— दूर करने वाले; तव—तुम्हारे; गुण—गुण; कृत—कर्म; नामधेयानि—नाम; वचन-गोचराणि—उच्चरित हो सकने वाले; भवन्तु—हो सकें ।.
 
अनुवाद
 
 हे ईश्वर, सम्भव है कि हम कँपकँपाने, भूखे रहने, गिरने, जम्हाई लेने या ज्वर के कारण मृत्यु के समय शोचनीय रुग्ण अवस्था में रहने के कारण आपके नाम का स्मरण न कर पाएँ। अत: हे ईश्वर, हम आपकी स्तुति करते हैं क्योंकि आप भक्तों पर वत्सल रहते हैं। आप हमें अपने पवित्र नाम, गुण तथा कर्म को स्मरण कराने में सहायक हों जिससे हमारे पापी जीवन के सभी पाप दूर हो जाँय।
 
तात्पर्य
 जीवन की वास्तविक सफलता है अन्ते नारायण-स्मृति अर्थात् मृत्यु के समय ईश्वर के पवित्र, नाम, गुण तथा रूप का स्मरण। भले ही हम मन्दिरों में ईश्वर की पूजा में लगे रहें, किन्तु भौतिक परिस्थितियाँ इतनी कठिन तथा दुस्तर हैं कि मृत्यु के समय रुग्ण अवस्था या मानसिक विक्षिप्तता
के कारण हम ईश्वर को स्मरण करना भूल सकते हैं। इसीलिए हमें ईश्वर से यही प्रार्थना करनी चाहिए कि हमें मृत्यु के समय अपने चरणकमल का स्मरण करने के योग्य अवश्य रखें, क्योंकि उस समय हमारी स्थिति दयनीय होगी। इस प्रसंग के लिए हमें श्रीमद्भागवत (६-२.९-१० तथा १४-१५) देखना चाहिए।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥