श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 4: भगवान् ऋषभदेव के लक्षण  »  श्लोक 11-12

 
श्लोक
कविर्हविरन्तरिक्ष: प्रबुद्ध: पिप्पलायन: ।
आविर्होत्रोऽथ द्रुमिलश्चमस: करभाजन: ॥ ११ ॥
इति भागवतधर्मदर्शना नव महाभागवतास्तेषां सुचरितं भगवन्महिमोपबृंहितं वसुदेवनारदसंवादमुपशमायनमुपरिष्टाद्वर्णयिष्याम: ॥ १२ ॥
 
शब्दार्थ
कवि:—कवि; हवि:—हवि; अन्तरिक्ष:—अन्तरिक्ष; प्रबुद्ध:—प्रबुद्ध; पिप्पलायन:—पिप्पलायन; आविर्होत्र:—आविर्होत्र; अथ—भी; द्रुमिल:—द्रुमिल; चमस:—चमस; करभाजन:—करभाजन; इति—इस प्रकार; भागवत-धर्म-दर्शना:— श्रीमद्भागवत के प्रामाणिक उपदेशक; नव—नौ; महा-भागवता:—परम भक्त; तेषाम्—उनमें से; सुचरितम्—अच्छे लक्षण; भगवत्-महिमा-उपबृंहितम्—भगवान् की महिमा से युक्त; वसुदेव-नारद-संवादम्—वसुदेव तथा नारद की वार्ता के अन्तर्गत; उपशमायनम्—मन को परम सन्तोष देने वाली; उपरिष्टात्—इसके बाद के, परवर्ती (ग्यारहवें स्कंध में); वर्णयिष्याम:—मैं विस्तार से व्याख्या करूँगा ।.
 
अनुवाद
 
 इन पुत्रों के अतिरिक्त कवि, हवि, अन्तरिक्ष, प्रबुद्ध, पिप्पलायन, आविर्होत्र, द्रुमिल, चमस तथा करभाजन भी हुए। ये सभी परम भक्त एवं श्रीमद्भागवत के प्रामाणिक उपदेशक थे। ये भक्त भगवान् वासुदेव के प्रति अपनी उत्कट भक्ति के कारण महिमा-मण्डित थे। मन की पूर्ण तुष्टि के लिए मैं (शुकदेव गोस्वामी) इन नौ भक्तों के चरित्रों का वर्णन आगे चलकर नारद वसुदेव संवाद प्रसंग के अन्तर्गत करूँगा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥