श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 10: देवताओं तथा वृत्रासुर के मध्य युद्ध  »  श्लोक 23

 
श्लोक
शूलै: परश्वधै: खड्‌गै: शतघ्नीभिर्भुशुण्डिभि: ।
सर्वतोऽवाकिरन् शस्त्रैरस्त्रैश्च विबुधर्षभान् ॥ २३ ॥
 
शब्दार्थ
शूलै:—बर्छों से; परश्वधै:—फरसों से; खड्गै:—तलवारों से; शतघ्नीभि:—शतघ्नियों से; भुशुण्डिभि:—भुशुण्डियों से; सर्वत:—चारों ओर; अवाकिरन्—तितर-बितर करके; शस्त्रै:—शस्त्रों से; अस्त्रै:—बाणों से; च—तथा; विबुध- ऋषभान्—देवताओं के प्रमुख ।.
 
अनुवाद
 
 बर्छों, त्रिशूलों, फरसों, तलवारों तथा शतघ्नी एवं भुशुण्डी जैसे अन्य हथियारों से सुसज्जित होकर असुरों ने विभिन्न दिशाओं से आक्रमण कर दिया और देवताओं की सेना के समस्त नायकों को तितर-बितर कर दिया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥