श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 32

 
श्लोक
अथ काल उपावृत्ते कुमार: समजायत ।
जनयन् शूरसेनानां श‍ृण्वतां परमां मुदम् ॥ ३२ ॥
 
शब्दार्थ
अथ—तत्पश्चात्; काले उपावृत्ते—कालक्रम से, समय आने पर; कुमार:—पुत्र ने; समजायत—जन्म लिया; जनयन्—जन्म होने का; शूरसेनानाम्—शूरसेन देश के निवासियों का; शृण्वताम्—सुनकर; परमाम्—अत्यधिक; मुदम्—हर्ष आनन्द ।.
 
अनुवाद
 
 तदनन्तर समय आने पर राजा के पुत्र उत्पन्न हुआ। इस समाचार को सुनकर शूरसेन देश के समस्त वासी अत्यधिक प्रसन्न हुए।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥