श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 17: माता पार्वती द्वारा चित्रकेतु को शाप  »  श्लोक 39

 
श्लोक
एतत्ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि ।
वृत्रस्यासुरजातेश्च कारणं भगवन्मते: ॥ ३९ ॥
 
शब्दार्थ
एतत्—यह; ते—तुमको; सर्वम्—सब कुछ; आख्यातम्—बता दिया; यत्—जो; माम्—मुझसे; त्वम्—तुमने; परिपृच्छसि—पूछा था; वृत्रस्य—वृत्रासुर का; असुर-जाते:—असुर योनि में उत्पन्न; च—तथा; कारणम्—कारण; भगवत्-मते:—कृष्णभावना में उन्नत बुद्धि का ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजा परीक्षित! तुमने मुझसे पूछा था कि परम भक्त वृत्रासुर ने असुर वंश में किस प्रकार जन्म लिया; अत: मैंने तुम्हें उसके विषय में सब कुछ बताने का प्रयास किया है।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥