श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 21

 
श्लोक
इमे श्रद्दधते ब्रह्मन्नृषयो हि मया सह ।
परिज्ञानाय भगवंस्तन्नो व्याख्यातुमर्हसि ॥ २१ ॥
 
शब्दार्थ
इमे—ये; श्रद्दधते—उत्सुक हैं; ब्रह्मन्—हे ब्राह्मण; ऋषय:—साधुजन; हि—निस्सन्देह; मया सह—मेरे साथ; परिज्ञानाय— जानने के लिए; भगवन्—हे महात्मन्; तत्—अत:; न:—हमको; व्याख्यातुम् अर्हसि—कृपा करके बताएँ ।.
 
अनुवाद
 
 हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं तथा यहाँ पर उपस्थित सभी साधुजन इसे जानने के लिए परम उत्सुक हैं। अत: हे महात्मन्! हमसे इसका कारण बताएँ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥